HIV Ka Full Form In Hindi

दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हमें हो जाएंगे एचआईवी (HIV) क्या होता है तथा HIV Ka Full Form In Hindi क्या होता है | एचआईवी (HIV) एक तरीके का वायरस होता है जो कि एड्स की वजह से बनता है यह आपके इम्यून सिस्टम को कमजोर कर देता है इस वायरस की वजह से वयक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है |

आइये एचआईवी (HIV) को और अच्छे से समझते हैं | HIV Ka Full Form In Hindi को समझने के लिए इस आर्टिकल को आप अंत तक पढ़िएगा |

HIV Ka Full Form In Hindi

एचआईवी (HIV) का फुल फॉर्म ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस होता है | एक प्रकार का वायरस होता है जो एड्स की वजह से होता है | एड्स, एचआईवी संक्रमण की अंतिम स्टेज होती है | जिसमें आपके शरीर की इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है | इसमें व्यक्ति के रोगो से लड़ने की क्षमता इतनी कम को जाती है की अगर उसे कोई कम खतरनाक संक्रमण भी हो तो शरीर अपने आप को ठीक नहीं कर पता है।

एचआईवी (HIV) हमारे शरीर पर अटैक करके हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है | अभी तक एचआईवी वायरस का इलाज नहीं ढूढ़ पाया है | जिन लोगों के शरीर में एचआईवी (HIV) वायरस आ जाता है वह लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने में असक्षम होते हैं |

HIV Ka Full Form In Hindi

HIV के वायरस को शरीर मैं पहुंचने से रोकने के लिए व्यक्ति को सेक्स करते वक़्त कंडोम का उपयोग करना चाहिए | तथा किसी व्यक्ति के द्वारा उपयोग किया हुआ इंजेक्शन दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए | HIV का इलाज समय से नहीं हो पाने पर अंतिम स्टेज मैं ये एड्स बन जाता है | यह वायरस इंसान के शरीर मैं मौजूद T सेल्स की संख्या को कम कर देता है | T सेल्स हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए का कार्य करते है | आपके शरीर मैं जितने जायदा T सेल्स होते है आपका सरीर उतना ही ज्यादा रोगो से लड़ने की क्षमता रखता है।

जैसे जैसे यह वायरस हमारे शरीर के T सेल्स को ख़तम करता जाता है वैसे वैसे हमारे शरीर की रोगो से लड़ने की क्षमता कम होती जाती है | जब हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है तब हमें कैंसर जैसी अन्य बीमारिया होने लगती है | अभी तक HIV का कोई इलाज संभव नहीं हो पाया है | परन्तु दवाइयों की मदद से इसे काफी हद तक कण्ट्रोल किया जा सकता है | HIV के इलाज मैं जिस दवाई का उपयोग होता है उसे एंटीरेट्रोवायरल (ART) कहते है |

यह दवाई hiv से ग्रसित व्यक्ति को लम्बे समय तक का जीवन प्रदान करती है | 1990 से पहले HIV का कोई इलाज नहीं था पर अब कुछ दवाओं व एडवांस थेरेपी की मदद से इसे काम किया जा सकता है | इन एडवांस थेरेपी की मदद से HIV संक्रमण व्यक्ति अच्छा व लम्बा जीवन व्यतीत कर सकता है | वैज्ञानिक कई सालो से HIV का इलाज ढूढ़ने मैं लगे हुए है पर अभीतक सफल नहीं हो पाए है। उम्मीद है भविष्य मैं वो जल्द ही इसका इलाज ढूढ़ लेंगे।

एड्स (AIDS) क्या है ?

AIDS की फुल फॉर्म अक्वायर्ड इम्मुनोडिफिसिएन्सी सिंड्रोम होती है। एड्स, HIV की अंतिम स्टेज को कहते है। एड्स से पीड़ित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है। जिस व्यक्ति को एड्स हो जाता है उसकी T सेल्स की संख्या 200 क्यूबिक मिलीमीटर से भी कम हो जाती है। किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर मैं T सेल्स की संख्या 500 से 1,600 सेल्स/मिमी के बीच होती है।

HIV व AIDS के बीच सम्बन्ध

किसी व्यक्ति को एड्स तभी होता है जब वो पहले से ही HIV से इन्फेक्टेड हो। परन्तु अगर किसी व्यक्ति को HIV है तो जरुरी नहीं की उसको एड्स भी हो | HIV की ३ स्टेजेस होती है :

स्टेज 1 : पहली स्टेज वायरस के संक्रमण के कुछ हफ्तों बाद शुरू हो जाती है |

स्टेज २ : यह विलंबता वाली स्टेज होती है।

स्टेज ३ : यह आखिरी स्टेज होती है अगर इसका इलाज न हो तो व्यक्ति को एड्स हो जाता है |

HIV कितनी जल्दी एड्स मैं बदल जाता है यह व्यक्ति के शरीर पर निर्भर करता है। HIV का वायरस व्यक्ति के शरीर मैं अनिश्चित काल के लिए रह सकता है। HIV और एड्स एक दूसरे से सम्बंधित है पर एक नहीं है। दोनों अलग अलग होते है।

HIV की शुरुआत कहाँ से हुई ?

HIV का संक्रमण की शुरुआत मध्य अफ्रीका मैं हुई थी। यह एक चिम्पांजी के अंदर पाया गया था। चिम्पांज़ी मैं जो वायरस मिला था उसका नाम सिमियन इम्मुनोडिफिसिएन्सी वायरस था जिसे SIV भी कहते है। जब यह वायरस इंसानो मैं पंहुचा तो इसने HIV का रूप ले लिया। कुछ वैज्ञानिको का ऐसा मानना है की यह वायरस 1800 के करीब मनुष्यो मैं आ गया था। उसके बाद से यह वायरस पुरे अफ्रीका मैं फ़ैल गया तथा अफ्रीका से पूरी दुनिया मैं।

HIV कैसे हो सकता है।

HIV किसी को भी हो सकता है कोई भी इससे सुरक्षित नहीं है | HIV किसी व्यक्ति के शरीर के तरल भाग मैं होता है। जैसे :

  • सीमन मैं
  • ब्लड मैं
  • रेक्टल मैं
  • स्तन मैं होने वाले दूध मैं

कुछ कारण जिनकी वजह से व्यक्ति को HIV हो सकता है :

  • अनल सेक्स के द्वारा (उन पुरुषो के साथ जो पुरुषो के साथ सेक्स करते है।)
  • जो लोग एक ही सुई का इस्तेमाल बार बार करते है।
  • टैटू बनाने वाले यन्त्र का बिना धोये इस्तेमाल मैं लाना।
  • स्तनपान से
  • पूर्व मास्टिकेशन के द्वारा।
  • hiv से ग्रसित व्यक्ति के खून से।

HIV के लक्षण

कई बार व्यक्ति मैं HIV के लक्षण महीनो व सालो तक नहीं दिखाई देते है। 80% वयक्तियो मैं HIV के लक्षण सामान्य फ्लू की तरह ही होते है। जयादातर व्यक्तिओ मैं इन्फेक्शन के २-3 हफ्तों बाद ही पता लग जाता है। HIV के कुछ शुरुआती लक्षण निम्नलिखित प्रकार होते है :

  • बुखार आना
  • जोड़ो मैं दर्द होना
  • ठण्ड लगना
  • रात मैं पसीना आना
  • गले मैं खराश होना
  • ग्रंथियों का बढ़ जाना
  • थकान लगना
  • कमजोरी आना
  • अचानक वजन का काम हो जाना
  • मुँह मैं छाले हो जाना

यह लक्षण तब दिखाई देते है जब आपका शरीर सिर्फ hiv से ही नहीं वायरस से भी लड़ता है। अगर इनमे से अधिकतर लक्षण आप मैं दिखाई दे रहे है तो आपको किसी डॉक्टर के पास अवश्य जाना चाहिए। आपको इनमे से किसी भी लक्षण को इग्नोर नहीं करना चाहिए जितना जल्दी हो सके आपको डॉक्टर के पास जाना चाहिए व टेस्ट करवाना चाहिए।

HIV पता करने के लिए टेस्ट

काफी सारे टेस्ट है जिन्हे करके आप यह पता लगा सकते है की आप HIV से इन्फेक्टेड है या नहीं। आप डॉक्टर के पास जाकर सलाह मशवरा कर सकते है की आपको कौन सा टेस्ट करवाना चाहिए। अगर आपको लगता है की आप मैं hiv के लक्षण है तो आपको बिलकुल देरी नहीं करनी चाहिए तथा जल्द से जल्द इनमे से कोई टेस्ट करवा लेना चाहिए। HIV पता करने के लिए कुछ टेस्ट निम्नलिखित प्रकार है :

एंटीबाडी टेस्ट

सबसे जयादा hiv पता करने के लिए एंटीबाडी टेस्ट किया जाता है। इसका परिणाम आने मैं 18-45 दिन लग सकते है। ज्यादातर डॉक्टर इसी टेस्ट को करवाने की सलाह देते है। अगर आप मैं कोई लक्षण दिखाई दे रहा है तो आप इस टेस्ट को करवा सकते है।

एंटीबाडी टेस्ट

इसमें एंटीबाडी पता करने के लिए ब्लड टेस्ट करते है। संक्रमण के 23 से 90 दिनों के बीच इतने एंटीबाडी बन जाते है की आप HIV का पता कर सके। यह एंटीबाडी रोगी के शरीर मैं लार के रूप मैं पाए जाते है।

न्यूक्लिक एसिड टेस्ट

यह टेस्ट काफी महंगा होता है तथा सामान्य स्क्रीनिंग के लिए उपयोग मैं नहीं आता है। यह टेस्ट वह व्यक्ति करा सकता है जिसमे शुरुआती HIV के लक्षण दिखाई देते है। यह शरीर मैं एंटीबाडी ढूढ़ने का कार्य नहीं करता। यह शरीर मैं वायरस ढूढ़ने का कार्य करता है। इस टेस्ट के दवारा 5 से 21 दिन मैं पता लग जाता है की व्यक्ति को HIV है या नहीं।

HIV से बचाव के उपाय

हालांकि अभीतक HIV की कोई ऐसी वैक्सीन नहीं बन पायी है जो HIV से बचा सके। परन्तु कुछ सावधानिया बरत कर HIV से बचा जा सकता है। HIV से बचाव के लिए कुछ उपाय निम्नलिखित प्रकार है :

सुरक्षित सेक्स

ज्यादातर लोगो मैं HIV असुरक्षित सेक्स करने से होता है जो व्यक्ति बिना कंडोम के सेक्स करता है। HIV से बचने के लिए व्यक्ति को यह ध्यान मैं रखना चाहिए की सेक्स करते वक़्त हमेशा कंडोम का इस्तेमाल करे। HIV से बचने के लिए निम्नलिखित बातें आप ध्यान मैं रख सकते है :

  • ऐसे व्यक्ति के साथ सेक्स न करे जिसे HIV हो |
  • व्यक्ति को STI परीक्षण करवा लेना चाहिए।
  • कंडोम का इस्तेमाल करना।
  • एक से अधिक लोगो के साथ सेक्स न करके।

नई सुई का इस्तेमाल करके

यदि आप इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हो तो इस बात का ध्यान रखे की इंजेक्शन नया हो किसी का उसे किया हुआ नहीं। अगर आप किसी का उपयोग किया हुआ इंजेक्शन दोबारा उपयोग करते है तथा व व्यक्ति पहले से ही HIV संक्रमित हो तो आप मैं HIV होने की सम्भावना काफी ज्यादा बढ़ जाती है।

गर्भावस्था से पहले इलाज करा के

यदि किसी महिला को HIV है तो वह गर्भावस्था के दौरान इसे अपने बच्चे तक पास कर सकती है। उसके बच्चे के HIV पॉजिटिव होने के चान्सेस काफी अधिक होते है। अगर वह महिला गर्भावस्था के दौरान इलाज करा लेती है तो उसके बच्चे को HIV से बचाया जा सकता है।

मेल सरकमसिजन

मेल सरकमसिजन HIV के संक्रमण को कम करने मैं काफी मददगार साबित होता है।

वर्तमान समय मैं डॉक्टरों के पास HIV का कोई भी इलाज नहीं है। लेकिन सही चिकित्सा व देखभाल के जरिये इसे काफी कम किया जा सकता है। यदि सही तरीके से इलाज व देखभाल की जाये तो HIV संक्रमित लोगो को अच्छा व लम्बा जीवन दिया जा सकता है।

दोस्तों मुझे उम्मीद है इस आर्टिकल ने आपको HIV Ka Full Form In Hindi को समझने मैं मदद की होगी। अगर आपको इस आर्टिकल से सम्बंदित कोई सुझाव व प्रश्न है तो आप हमें कमेंट करके बता सकते है। अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा है तो इसे अपने दोस्तों व फॅमिली मेंबर्स के साथ जरुर शेयर कीजिएगा।

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